रविवार व्रत कथा
Sunday (Ravivar) Vrat Katha
संक्षिप्त उत्तर
रविवार व्रत सूर्य देव को समर्पित है। इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके सूर्य को जल अर्घ्य दें, लाल चंदन, लाल फूल अर्पित करें। "ॐ सूर्याय नमः" मंत्र जाप करें। सूर्यास्त से पहले एक समय भोजन करें। गेहूं और गुड़ से बना भोजन खाएं। यह व्रत आरोग्य, यश और सूर्य दोष शांति हेतु किया जाता है।
रविवार व्रत कथा — संपूर्ण कथा
प्राचीन काल में एक गाँव में एक बुढ़िया रहती थी। वह बड़ी धर्मपरायण और सूर्य देव की परम भक्त थी। प्रत्येक रविवार को वह प्रातःकाल उठकर स्नान करती, घर-आंगन को गोबर से लीपती, सूर्य देव को जल का अर्घ्य देती और एक समय भोजन करके व्रत रखती। भोजन भी सूर्यास्त से पहले कर लेती।
बुढ़िया की एक पड़ोसन थी जो उसके व्रत का उपहास करती थी। वह कहती — "क्या रखा है इस व्रत में? सूर्य तो सबके लिए उगता है। तुम व्रत रखो या न रखो, क्या फर्क पड़ता है?" बुढ़िया शांति से कहती — "बहन! सूर्य देव जगत के प्राण हैं। उनकी कृपा से ही जीवन है। व्रत का फल मिलता है।"
पड़ोसन ने बुढ़िया की बात नहीं मानी। इतना ही नहीं, उसने एक रविवार को जानबूझकर अपनी गाय बुढ़िया के लीपे हुए आंगन में छोड़ दी। गाय ने आंगन को गंदा कर दिया। बुढ़िया ने शांतिपूर्वक पुनः आंगन साफ किया और सूर्य देव की पूजा की।
अगले रविवार को पड़ोसन ने फिर शरारत की। उसने बुढ़िया के दरवाजे पर कचरा डाल दिया। बुढ़िया फिर भी क्रोध नहीं हुई। उसने शांतिपूर्वक सफाई की, स्नान किया और सूर्य को अर्घ्य दिया। सूर्य देव अपनी भक्त की सहनशीलता और भक्ति से बहुत प्रसन्न हुए।
सूर्य देव की कृपा से बुढ़िया का आंगन सोने का बन गया। जहाँ वह गोबर से लीपती थी, वहाँ स्वर्ण प्रकट होने लगा। बुढ़िया के घर में धन-धान्य की वर्षा हो गई। उसका रोगी शरीर स्वस्थ हो गया, चेहरे पर तेज आ गया और पूरे गाँव में उसका सम्मान बढ़ गया।
पड़ोसन ने जब बुढ़िया का ऐश्वर्य देखा तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और लालच भी आया। उसने भी रविवार व्रत रखना शुरू किया, किंतु उसकी भक्ति सच्ची नहीं थी — उसने केवल धन लालच से व्रत रखा। उसने अपने आंगन को भी गोबर से लीपा, किंतु उसके आंगन से स्वर्ण नहीं, बल्कि कीड़े-मकोड़े निकले।
पड़ोसन ने क्रोधित होकर राजा से शिकायत की — "महाराज! यह बुढ़िया जादू-टोना करती है। इसके आंगन से सोना निकलता है।" राजा ने बुढ़िया को बुलवाया। बुढ़िया ने सारी बात बताई। राजा ने कहा — "तू अपने रविवार व्रत की विधि राज्य में सबको बता।"
बुढ़िया ने पूरे राज्य में रविवार व्रत का प्रचार किया। उसने बताया — "सूर्योदय से पहले स्नान करो, सूर्य देव को जल का अर्घ्य दो, लाल फूल और लाल चंदन अर्पित करो, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करो, एक समय भोजन करो — वह भी सूर्यास्त से पहले। गेहूं और गुड़ से बना भोजन खाओ। किसी का अपमान न करो।"
पड़ोसन ने भी अपनी गलती मानी और क्षमा मांगी। उसने भी सच्ची भक्ति से रविवार व्रत रखना शुरू किया। सूर्य देव ने उसे भी क्षमा किया और आशीर्वाद दिया।
तब से रविवार को सूर्य देव की पूजा और व्रत की परंपरा चली आ रही है। जो कोई भी सच्ची श्रद्धा से रविवार व्रत रखता है, सूर्य देव को अर्घ्य देता है और इस कथा को सुनता या पढ़ता है, सूर्य देव उसे आरोग्य, तेज, यश, धन और दीर्घायु प्रदान करते हैं। सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं — उनकी पूजा का फल शीघ्र मिलता है।
संदर्भ: रविवार व्रत की कथा भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित है। सूर्य देव की महिमा सांब पुराण, सूर्य सिद्धांत और आदित्य हृदय स्तोत्र (वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड) में विस्तार से बताई गई है। ऋग्वेद में सूर्य सूक्त सूर्य उपासना का प्राचीनतम स्रोत है।
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रविवार को सूर्य देव की पूजा कैसे करें?
सूर्योदय पूर्व स्नान
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। स्वच्छ लाल, केसरिया या सफेद वस्त्र धारण करें। पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
सूर्य अर्घ्य
तांबे के लोटे में जल लें, उसमें लाल फूल, लाल चंदन, अक्षत और कुमकुम डालें। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में सूर्य की ओर मुख करके दोनों हाथों से जल की धारा गिराते हुए अर्घ्य दें। "ॐ सूर्याय नमः" बोलते हुए तीन बार अर्घ्य दें।
सूर्य पूजा
सूर्य देव की प्रतिमा या चित्र पर लाल चंदन, लाल फूल (कमल, गुलाब), अक्षत चढ़ाएं। गुड़ और गेहूं का भोग लगाएं। घी का दीपक जलाएं।
मंत्र जाप और स्तोत्र
"ॐ सूर्याय नमः" या "ॐ घृणिः सूर्य आदित्यः" मंत्र का 108 बार जाप करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ अत्यंत फलदायी है। सूर्य के 12 नामों का जाप करें।
कथा पाठ और आरती
रविवार व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। सूर्य देव की आरती करें। सूर्य नमस्कार (योग) करना भी अत्यंत लाभकारी है।
प्रसाद और दान
गुड़, गेहूं की रोटी और फल का प्रसाद वितरित करें। गरीबों को लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़ और तांबे की वस्तु दान करें। सूर्यास्त से पहले एक समय भोजन अवश्य कर लें।
रविवार व्रत कथा में क्या सामग्री चाहिए?
📿 मंत्र
ॐ सूर्याय नमः
मैं सूर्य देव को नमस्कार करता हूँ। सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं — समस्त जगत के प्राणदाता, अंधकार के नाशक और आरोग्य के स्वामी। यह मंत्र तेज, आरोग्य और यश प्रदान करता है।
📿 अन्य मंत्र
ॐ घृणिः सूर्य आदित्यः
ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्
जबा कुसुम संकाशं काश्यपेयं महद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्।।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः (सूर्य बीज मंत्र)
रविवार व्रत कथा के नियम
- • सूर्योदय से पहले स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य अवश्य दें
- • सूर्यास्त से पहले एक ही समय भोजन करें — रात्रि में भोजन न करें
- • नमक का त्याग करें (कठोर व्रत में) या सेंधा नमक उपयोग करें
- • व्रत के दिन किसी से झूठ न बोलें और क्रोध न करें
- • लाल रंग की वस्तुओं का दान करें — तांबा, लाल वस्त्र, गुड़, गेहूं
✅ क्या खाएं
- → गेहूं की रोटी या पूरी
- → गुड़ और गेहूं से बने व्यंजन (गुड़ की रोटी, गुलगुले)
- → फल (सेब, अनार, पपीता)
- → दूध और दूध से बनी मिठाई
- → खीर
- → सूखे मेवे
- → शकरकंद
❌ क्या न खाएं
- ✗ नमक (कठोर व्रत में — सेंधा नमक चलता है)
- ✗ तेल में तला भोजन (कुछ परंपराओं में)
- ✗ मांस, मछली, अंडा
- ✗ शराब या नशीला पदार्थ
- ✗ प्याज, लहसुन
- ✗ बासी और तामसिक भोजन
रविवार व्रत कथा के लाभ
- • नेत्र रोग, चर्म रोग और हड्डी संबंधी रोगों में लाभ होता है
- • शरीर में तेज, ओज और आत्मविश्वास बढ़ता है
- • सूर्य ग्रह का दोष शांत होता है और पितृ दोष में भी लाभ होता है
- • समाज में मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और यश प्राप्त होता है
- • सरकारी नौकरी और उच्च पद प्राप्ति में सहायता मिलती है
- • आयु और आरोग्य की रक्षा होती है — सूर्य देव आरोग्य के देवता हैं
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रविवार व्रत कैसे रखें?
सूर्योदय से पहले स्नान करें, तांबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य दें, लाल चंदन-फूल अर्पित करें, "ॐ सूर्याय नमः" जाप करें, कथा पढ़ें। सूर्यास्त से पहले गेहूं-गुड़ का एक समय भोजन करें।
रविवार व्रत में क्या खाना चाहिए?
गेहूं और गुड़ से बना भोजन, फल, दूध, खीर और सूखे मेवे खा सकते हैं। एक समय सूर्यास्त से पहले भोजन करें। नमक का त्याग करें या सेंधा नमक उपयोग करें।
रविवार व्रत कितने दिन रखना चाहिए?
रविवार व्रत 12 या 30 रविवार तक लगातार रखने का विधान है। सूर्य दोष शांति हेतु 7 या 11 रविवार भी प्रभावी हैं। कुछ भक्त जीवनपर्यंत यह व्रत रखते हैं।
सूर्य को अर्घ्य कैसे दें?
तांबे के लोटे में जल लें, उसमें लाल फूल, अक्षत, कुमकुम डालें। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके, दोनों हाथों से लोटा ऊपर उठाकर धीरे-धीरे जल की धारा गिराएं। "ॐ सूर्याय नमः" बोलते हुए तीन बार अर्घ्य दें।
रविवार व्रत का क्या फल मिलता है?
सूर्य देव प्रसन्न होकर आरोग्य, तेज, यश, धन और दीर्घायु प्रदान करते हैं। नेत्र रोग, चर्म रोग दूर होते हैं। सूर्य दोष शांत होता है और सरकारी कार्यों में सफलता मिलती है।
सूर्य नमस्कार और रविवार व्रत में क्या संबंध है?
सूर्य नमस्कार (12 आसनों वाला योग) सूर्य देव की शारीरिक उपासना है। रविवार व्रत के दिन सूर्योदय के समय सूर्य नमस्कार करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। प्रत्येक आसन में सूर्य के एक नाम का उच्चारण करें।
रविवार को तांबे का लोटा क्यों उपयोग करें?
तांबा (कॉपर) सूर्य ग्रह की धातु है। तांबे के लोटे से अर्घ्य देने पर सूर्य की किरणें तांबे से होकर जल में उतरती हैं, जो आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से लाभकारी है। तांबे का जल पीने से भी स्वास्थ्य लाभ होता है।
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