बृहस्पतिवार व्रत कथा

Thursday (Brihaspativar) Vrat Katha

भगवान विष्णु / बृहस्पति देव बृहस्पतिवार (गुरुवार) साप्ताहिक
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संक्षिप्त उत्तर

बृहस्पतिवार (गुरुवार) व्रत भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित है। इस दिन पीले वस्त्र पहनें, केले के पेड़ या विष्णु जी की पूजा करें, चने की दाल-गुड़ का प्रसाद बनाएं। "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र जाप करें। यह व्रत धन, सम्मान, विवाह और गुरु कृपा हेतु रखा जाता है।

बृहस्पतिवार व्रत कथा — संपूर्ण कथा

प्राचीन काल में एक अत्यंत प्रतापी राजा था। वह बड़ा धनवान, बलवान और प्रजापालक था। उसकी रानी भी बड़ी धर्मपरायण और दयालु थी। रानी प्रत्येक बृहस्पतिवार को व्रत रखती, ब्राह्मणों को भोजन कराती और पीले वस्त्र दान करती थी।

एक बृहस्पतिवार को रानी व्रत की तैयारी कर रही थी। उसने राजा से कहा — "हे महाराज! आज बृहस्पतिवार का व्रत है। कृपया आज न तो बाल कटवाएं, न कपड़े धुलवाएं और न ही कोई अशुभ कार्य करें।" राजा अहंकार में बोला — "मैं राजा हूँ, मुझे किसी व्रत-उपवास की आवश्यकता नहीं। मेरी शक्ति और सेना ही मेरा भाग्य है।"

रानी ने बहुत समझाया किंतु राजा ने नहीं माना। उसने बृहस्पतिवार के दिन ही बाल कटवाए, कपड़े धुलवाए और बृहस्पति देव का अपमान किया। बृहस्पति देव ने जब यह देखा तो उन्हें बड़ा क्रोध आया।

कुछ ही दिनों में राजा का राज्य छिन गया। शत्रु राजाओं ने आक्रमण किया और उसे पराजित कर दिया। राजा-रानी को राज्य छोड़कर वन में भटकना पड़ा। धन-दौलत, सेना, सेवक — सब कुछ नष्ट हो गया। राजा को अब भूख-प्यास से तड़पना पड़ रहा था।

एक दिन रानी जंगल में लकड़ी बीन रही थी। वहाँ कुछ स्त्रियां बैठकर बृहस्पतिवार की कथा सुन रही थीं और पीले रंग का भोजन बना रही थीं। रानी ने उनसे पूछा — "बहनों! यह कौन सा व्रत है?" उन्होंने बताया — "यह बृहस्पतिवार का व्रत है। भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा से धन, मान-सम्मान और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।"

उन स्त्रियों ने रानी को बृहस्पतिवार व्रत की पूरी विधि बताई — "पीले वस्त्र पहनो, चने की दाल और गुड़ का प्रसाद बनाओ, केले के पेड़ या विष्णु जी की पूजा करो, कथा सुनो और ब्राह्मणों को भोजन कराओ। सात बृहस्पतिवार व्रत रखने से बृहस्पति देव प्रसन्न हो जाते हैं।"

रानी ने उसी दिन से बृहस्पतिवार व्रत रखना आरंभ कर दिया। उसने जंगली फूल और फल से पूजा की, कथा सुनी और भगवान विष्णु का ध्यान किया। पहले ही बृहस्पतिवार को उसे जंगल में स्वर्ण मुद्राओं से भरा एक घड़ा मिल गया। रानी ने उससे भोजन और वस्त्र खरीदे।

राजा ने जब रानी को व्रत करते देखा तो पहले तो उसने उपहास किया। किंतु जब भाग्य बदलने लगा तो राजा भी बृहस्पतिवार व्रत रखने लगा। सात बृहस्पतिवार पूर्ण होने पर बृहस्पति देव प्रसन्न हुए। शत्रु राजा की सेना में बगावत हो गई और राजा को अपना राज्य वापस मिल गया।

राज्य वापस पाकर राजा ने सबसे पहले बृहस्पति देव की भव्य पूजा की। उसने घोषणा करवाई कि प्रजा में हर कोई बृहस्पतिवार व्रत रखे। ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दी, पीले वस्त्र वितरित किए और चने की दाल-गुड़ का भंडारा कराया।

तब से बृहस्पतिवार व्रत की परंपरा चली आ रही है। जो कोई भी श्रद्धापूर्वक बृहस्पतिवार का व्रत रखता है, बृहस्पति देव की कथा सुनता है और भगवान विष्णु का ध्यान करता है, उसके जीवन में धन, यश, सम्मान और सुख-समृद्धि सदा बनी रहती है। बृहस्पतिवार व्रत का अपमान करने वाले को राजा की भांति कष्ट भोगने पड़ते हैं।

संदर्भ: बृहस्पतिवार व्रत कथा का वर्णन भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। भगवान विष्णु की महिमा विष्णु पुराण, भागवत पुराण और पद्म पुराण में विस्तार से वर्णित है। बृहस्पति ग्रह की शांति विधि ज्योतिष ग्रंथों में बताई गई है।

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बृहस्पतिवार (गुरुवार) को भगवान विष्णु / बृहस्पति देव की पूजा कैसे करें?

1

स्नान और पीले वस्त्र

प्रातःकाल स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। पीला रंग बृहस्पति ग्रह और भगवान विष्णु का प्रिय रंग है। पूजा स्थान पर पीला कपड़ा बिछाएं।

2

विष्णु/बृहस्पति पूजा स्थापना

भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। केले के पेड़ की पूजा भी बृहस्पतिवार को विशेष फलदायी है। हल्दी से स्वस्तिक बनाएं। जल, पंचामृत से अभिषेक करें।

3

पीले पुष्प और हल्दी अर्पण

पीले फूल (गेंदा, पीला गुलाब, सरसों के फूल), हल्दी, पीला चंदन और केसर अर्पित करें। तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं — तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।

4

चने की दाल और भोग

चने की दाल और गुड़ का प्रसाद बनाएं। केला, पीली मिठाई (बेसन के लड्डू), घी और शक्कर का भोग लगाएं। तुलसी जल अर्पित करें।

5

मंत्र जाप और कथा पाठ

"ॐ बृं बृहस्पतये नमः" और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें। बृहस्पतिवार व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी अत्यंत फलदायी है।

6

आरती और दान

भगवान विष्णु की आरती करें। ब्राह्मण को पीले वस्त्र, चने की दाल, गुड़, केला और दक्षिणा दान करें। प्रसाद में चने की दाल-गुड़ और केला वितरित करें।

बृहस्पतिवार व्रत कथा में क्या सामग्री चाहिए?

भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र पीला वस्त्र (पूजा स्थान और पहनने हेतु) चने की दाल (पीली) गुड़ (व्रत प्रसाद का मुख्य भाग) केला (कच्चा — पूजा हेतु, पका — प्रसाद हेतु) हल्दी (पूजा और तिलक हेतु) पीले फूल (गेंदा, पीला गुलाब) तुलसी दल केसर पीला चंदन घी का दीपक धूप और अगरबत्ती बेसन के लड्डू पंचामृत सामग्री

📿 मंत्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः

मैं देवगुरु बृहस्पति को नमस्कार करता हूँ। "बृं" बृहस्पति ग्रह का बीज मंत्र है। यह मंत्र ज्ञान, धन, सम्मान और गुरु कृपा प्रदान करता है।

📿 अन्य मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्।।

बृहस्पतिवार व्रत कथा के नियम

  • व्रत के दिन पीले वस्त्र धारण करें और पीले रंग का भोजन खाएं
  • बृहस्पतिवार को बाल न कटवाएं, कपड़े न धुलवाएं (प्रचलित मान्यता)
  • एक समय भोजन करें — चने की दाल और गुड़ से बना भोजन उत्तम
  • ब्राह्मण या गुरु का सम्मान करें, दान-दक्षिणा दें
  • केले के पेड़ पर जल चढ़ाएं और पीले रंग का धागा बांधें

✅ क्या खाएं

  • चने की दाल (पीली दाल)
  • गुड़ (गुड़ से बने व्यंजन)
  • केला
  • बेसन के लड्डू या बूंदी
  • पीले चावल (केसर या हल्दी वाले)
  • घी से बनी मिठाई
  • फल (पीले रंग के — केला, आम, पपीता)
  • दूध और दूध से बनी मिठाई

❌ क्या न खाएं

  • नमक (कुछ परंपराओं में — सेंधा नमक चलता है)
  • मांस, मछली, अंडा
  • शराब या नशीला पदार्थ
  • प्याज, लहसुन
  • खट्टे पदार्थ
  • बासी भोजन

बृहस्पतिवार व्रत कथा के लाभ

  • धन-संपत्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है — दरिद्रता दूर होती है
  • विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी मिलता है
  • बृहस्पति (गुरु) ग्रह का दोष शांत होता है
  • समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ती है
  • संतान को उत्तम शिक्षा और बुद्धि प्राप्त होती है
  • गुरुजनों और बड़ों का आशीर्वाद मिलता है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृहस्पतिवार (गुरुवार) व्रत कैसे रखें?

पीले वस्त्र पहनें, भगवान विष्णु या केले के पेड़ की पूजा करें, चने की दाल-गुड़ का प्रसाद बनाएं, "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" जाप करें, कथा सुनें और ब्राह्मण को पीले वस्त्र-दक्षिणा दान करें।

गुरुवार व्रत में क्या खाना चाहिए?

चने की दाल, गुड़, केला, बेसन के लड्डू, पीले चावल और दूध-मिठाई खा सकते हैं। पीले रंग के खाद्य पदार्थ शुभ हैं। एक समय भोजन करें।

बृहस्पतिवार व्रत कितने दिन रखना चाहिए?

बृहस्पतिवार व्रत 7, 11, 16 या 21 गुरुवार तक लगातार रखने का विधान है। विवाह बाधा हेतु 16 गुरुवार विशेष फलदायी हैं। कुछ भक्त जीवनपर्यंत यह व्रत रखते हैं।

गुरुवार व्रत का क्या फल मिलता है?

बृहस्पति देव प्रसन्न होकर धन, सम्मान, विवाह सुख, संतान सुख और गुरु कृपा प्रदान करते हैं। गुरु ग्रह का दोष शांत होता है और जीवन में समृद्धि आती है।

गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा क्यों करते हैं?

केले का पेड़ बृहस्पति (गुरु) ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इसकी पूजा से बृहस्पति ग्रह प्रसन्न होते हैं। केले के पेड़ पर जल और हल्दी मिला दूध चढ़ाना शुभ है।

गुरुवार को बाल क्यों नहीं कटवाने चाहिए?

मान्यता है कि बृहस्पतिवार को बाल कटवाने, कपड़े धुलवाने और नाखून काटने से बृहस्पति ग्रह का अपमान होता है, जिससे धन-हानि और मान-सम्मान में कमी आती है। हालांकि यह लोक मान्यता है।

बृहस्पतिवार व्रत कब से शुरू करें?

बृहस्पतिवार व्रत किसी भी शुक्ल पक्ष के गुरुवार से आरंभ कर सकते हैं। पौष, चैत्र या श्रावण मास का गुरुवार उत्तम माना जाता है। गुरु पूर्णिमा से आरंभ करना भी शुभ है।

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