नवग्रह पूजा

नवग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु) 2-3 घंटे ग्रह दोष शांति, ग्रह गोचर, जन्म कुंडली अनुसार

📖 कथा / महत्व

नवग्रह पूजा का मूल सिद्धांत यह है कि सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — ये नौ ग्रह मनुष्य के जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। जन्म कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति के अनुसार शुभ-अशुभ फल मिलते हैं। नवग्रह पूजा से अशुभ ग्रहों की शांति होती है और शुभ ग्रहों का बल बढ़ता है। वैदिक ज्योतिष में इसे सबसे प्रभावशाली ग्रह शांति उपाय माना गया है।

🗓️ सर्वोत्तम दिन: प्रत्येक ग्रह के अपने वार — रवि (सूर्य), सोम (चंद्र), मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनिअमावस्या या पूर्णिमा तिथि विशेष फलदायीग्रह गोचर या दशा परिवर्तन के समयनवरात्रि या संक्रांति के अवसर परशुक्ल पक्ष की पंचमी, दशमी या पूर्णिमा को ⏱️ 2.5 से 3.5 घंटे (हवन सहित) 🔴 उन्नत

🧘 पूजा से पहले — तैयारी

📋 सामग्री

नवग्रह यंत्र या नौ ग्रहों की प्रतिमा — 1 सेट गेहूं (सूर्य हेतु) — 250 ग्राम चावल (चंद्र हेतु) — 250 ग्राम अरहर दाल (मंगल हेतु) — 250 ग्राम मूंग दाल (बुध हेतु) — 250 ग्राम चना दाल (बृहस्पति हेतु) — 250 ग्राम सफेद राजमा (शुक्र हेतु) — 250 ग्राम काले तिल (शनि हेतु) — 250 ग्राम उड़द दाल (राहु हेतु) — 250 ग्राम कुल्थी दाल (केतु हेतु) — 250 ग्राम नौ रंग के वस्त्र — लाल, सफेद, लाल, हरा, पीला, सफेद, काला, धूम्र, भूरा नौ रंग के पुष्प — प्रत्येक ग्रह हेतु अलग हवन सामग्री — 500 ग्राम शुद्ध घी — 500 मिली तिल (काले एवं सफेद) — 200 ग्राम गुड़ — 200 ग्राम कलश एवं नारियल — 1 सेट गंगाजल — 200 मिली चंदन पाउडर — 50 ग्राम सिंदूर, हल्दी, कुमकुम — प्रत्येक 25 ग्राम अगरबत्ती एवं धूप — 2 पैकेट दीपक एवं कपूर — 9 दीपक आम की लकड़ी (हवन हेतु) — 1 किलो दक्षिणा — यथाशक्ति पान, सुपारी एवं लौंग — 9-9 पीस

📝 पूजा विधि — चरण

1

स्नान एवं पूजा स्थल शुद्धि (10 मिनट)

प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और भूमि पर रंगोली या स्वस्तिक बनाएं। नौ दीपक प्रज्वलित करने हेतु स्थान तैयार करें।

2

कलश स्थापना एवं संकल्प (15 मिनट)

तांबे या मिट्टी के कलश में जल, सुपारी, सिक्का, दूर्वा डालकर आम के पत्ते और नारियल रखें। पुरोहित के साथ संकल्प मंत्र बोलें — अपना नाम, गोत्र, नक्षत्र और पूजा का उद्देश्य स्पष्ट करें।

3

गणेश पूजन (10 मिनट)

सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन करें। सिंदूर, दूर्वा, मोदक अर्पित करें। विघ्न निवारण हेतु "ॐ गं गणपतये नमः" का 21 बार जाप करें। बिना गणेश पूजन के कोई भी पूजा शास्त्रानुसार अधूरी मानी जाती है।

4

नवग्रह मंडल स्थापना (20 मिनट)

वेदी पर नवग्रह मंडल बनाएं — सूर्य मध्य में, चंद्र पूर्व में, मंगल दक्षिण में, बुध उत्तर-पूर्व में, बृहस्पति उत्तर में, शुक्र पूर्व-दक्षिण में, शनि पश्चिम में, राहु दक्षिण-पश्चिम में, केतु उत्तर-पश्चिम में स्थापित करें। प्रत्येक ग्रह के स्थान पर संबंधित अनाज का पुंज रखें।

5

प्रत्येक ग्रह का आवाहन एवं पूजन (30 मिनट)

सूर्य से प्रारंभ करते हुए प्रत्येक ग्रह का अलग-अलग बीज मंत्र से आवाहन करें। संबंधित रंग के पुष्प, वस्त्र और अनाज अर्पित करें। प्रत्येक ग्रह को चंदन, अक्षत, धूप, दीप दिखाएं।

6

नवग्रह बीज मंत्र जाप (40 मिनट)

प्रत्येक ग्रह के बीज मंत्र का 108-108 बार जाप करें — सूर्य (ॐ ह्रां), चंद्र (ॐ श्रां), मंगल (ॐ क्रां), बुध (ॐ ब्रां), बृहस्पति (ॐ ग्रां), शुक्र (ॐ द्रां), शनि (ॐ प्रां), राहु (ॐ भ्रां), केतु (ॐ स्रां)। रुद्राक्ष या स्फटिक माला पर जाप करें।

7

नवग्रह स्तोत्र पाठ (15 मिनट)

"जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्" से प्रारंभ होने वाले नवग्रह स्तोत्र का पूर्ण पाठ करें। यह स्तोत्र सभी नौ ग्रहों की स्तुति करता है और उनकी कृपा प्राप्त करने का सरलतम उपाय है।

8

नवग्रह हवन (30 मिनट)

हवन कुंड प्रज्वलित करें। प्रत्येक ग्रह की विशेष आहुति दें — सूर्य हेतु घी-गेहूं, चंद्र हेतु चावल-दूध, मंगल हेतु तिल-गुड़, शनि हेतु काले तिल-सरसों का तेल। "स्वाहा" बोलकर प्रत्येक आहुति समर्पित करें।

9

पूर्णाहुति एवं आरती (10 मिनट)

नारियल, घी और हवन सामग्री से पूर्णाहुति दें। कपूर और घी का दीपक जलाकर नवग्रह आरती करें। सभी उपस्थित जन खड़े होकर आरती में सम्मिलित हों।

10

दान एवं विसर्जन (15 मिनट)

प्रत्येक ग्रह से संबंधित वस्तु का दान करें — सूर्य हेतु गेहूं-गुड़, शनि हेतु काले तिल-तेल, बृहस्पति हेतु पीली वस्तु। ब्राह्मण को भोजन एवं दक्षिणा दें। पूजा सामग्री का नदी या पवित्र जल में विसर्जन करें।

11

प्रसाद वितरण एवं ग्रह शांति मार्गदर्शन (10 मिनट)

प्रसाद सभी को वितरित करें। पुरोहित से अपनी कुंडली अनुसार दैनिक ग्रह शांति उपाय जानें — कौन सा रत्न धारण करें, कौन सा दान करें, कौन सा मंत्र नित्य जपें।

📿 मंत्र

ॐ नवग्रहाय विद्महे, नवज्योतिषे धीमहि, तन्नो ग्रहाः प्रचोदयात्

हम नवग्रहों को जानते हैं, नौ ज्योतियों का ध्यान करते हैं, वे ग्रह हमें सद्बुद्धि प्रदान करें।

📿 अन्य मंत्र

ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् — सूर्य गायत्री मंत्र, सूर्य ग्रह की शांति एवं बल वृद्धि हेतु

ॐ शं शनैश्चराय नमः — शनि बीज मंत्र, शनि साढ़ेसाती एवं ढैय्या शांति हेतु विशेष प्रभावी

ॐ रां राहवे नमः। ॐ कें केतवे नमः — राहु-केतु शांति मंत्र, काल सर्प दोष एवं राहु-केतु दशा में जाप करें

⚠️ ये गलतियाँ न करें

✅ पूजा के बाद

✅ लाभ

  • जन्म कुंडली के अशुभ ग्रहों की शांति एवं पीड़ा में कमी
  • शनि साढ़ेसाती, राहु-केतु दशा, मांगलिक दोष जैसे ग्रह दोषों का निवारण
  • शिक्षा, करियर, व्यापार एवं आर्थिक क्षेत्र में प्रगति
  • शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार एवं मानसिक शांति
  • वैवाहिक जीवन, पारिवारिक संबंधों एवं सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि

❓ FAQ

नवग्रह पूजा कब करानी चाहिए?

जन्म कुंडली में ग्रह दोष होने पर, ग्रह गोचर (शनि साढ़ेसाती, राहु-केतु दशा) के समय, या किसी शुभ कार्य (विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार) से पहले करानी चाहिए। ज्योतिषी की सलाह से मुहूर्त निकलवाएं।

क्या बिना पंडित के नवग्रह पूजा हो सकती है?

नवग्रह पूजा विशेष मंत्रों और विधि-विधान की मांग करती है। अनुभवी वैदिक पुरोहित से कराना उचित है। हालांकि, घर पर नवग्रह स्तोत्र का पाठ और बीज मंत्रों का जाप स्वयं कर सकते हैं।

नवग्रह पूजा का प्रभाव कितने दिन में दिखता है?

सामान्यतः 40 दिन से 6 माह में प्रभाव दिखने लगता है। यह व्यक्ति की कुंडली में ग्रह की स्थिति और दशा पर निर्भर करता है। नियमित मंत्र जाप और दान से प्रभाव शीघ्र आता है।

क्या सभी नौ ग्रहों की पूजा एक साथ करना आवश्यक है?

सम्पूर्ण नवग्रह पूजा में सभी नौ ग्रहों की पूजा होती है। परंतु यदि किसी विशेष ग्रह दोष की शांति करनी हो तो उस ग्रह की अलग से भी पूजा हो सकती है। ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें।

नवग्रह पूजा में कितना खर्च आता है?

सामग्री का खर्च लगभग 2,000-5,000 रुपये तक होता है। पुरोहित दक्षिणा और दान अलग से होता है। मंदिर में कराने पर कुल 5,000-15,000 रुपये तक खर्च हो सकता है।

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