दुर्गा पूजा

देवी दुर्गा 1.5-2 घंटे नवरात्रि (चैत्र एवं शारदीय), अष्टमी, मंगलवार

📖 कथा / महत्व

देवी दुर्गा की उत्पत्ति तब हुई जब महिषासुर नामक राक्षस ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया। ब्रह्मा के वरदान से कोई देवता या पुरुष उसे मार नहीं सकता था। तब सभी देवताओं — ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इंद्र — की संयुक्त शक्ति (तेज) से एक दिव्य स्त्री शक्ति प्रकट हुई — देवी दुर्गा। प्रत्येक देवता ने अपना अस्त्र दिया — शिव का त्रिशूल, विष्णु का चक्र, इंद्र का वज्र। देवी ने नौ दिन तक महिषासुर से युद्ध किया और दशमी (विजयदशमी) को उसका वध किया। इसीलिए नवरात्रि 9 दिन मनाई जाती है।

🗓️ सर्वोत्तम दिन: शारदीय नवरात्रि (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी — सितंबर/अक्टूबर — सर्वश्रेष्ठ)चैत्र नवरात्रि (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी — मार्च/अप्रैल)मंगलवार एवं शुक्रवार (देवी पूजा के विशेष दिन)अष्टमी तिथि (प्रत्येक माह की — विशेषकर शुक्ल पक्ष)गुप्त नवरात्रि (आषाढ़ एवं माघ मास — तांत्रिक साधकों के लिए) ⏱️ 45-90 मिनट प्रतिदिन (नवरात्रि के 9 दिन), कलश स्थापना 1.5 घंटे 🟡 मध्यम

🧘 पूजा से पहले — तैयारी

📋 सामग्री

दुर्गा माता की मूर्ति या चित्र (फ्रेम किया हुआ या कैलेंडर) लाल चुनरी — 2 (एक माता को ओढ़ाने हेतु, एक कलश पर) सिंदूर (50 ग्राम) और कुमकुम/रोली (25 ग्राम) कलश — तांबे या मिट्टी का (1) और साबुत नारियल (1) ज्वारा बोने हेतु — मिट्टी का चौड़ा बर्तन, मिट्टी (2 किलो), गेहूं या जौ के बीज (100 ग्राम) अखंड ज्योति का दीपक — बड़ा मिट्टी का दीया और घी/सरसों तेल (1 लीटर — 9 दिन हेतु) रुई की मोटी बत्ती (9 — प्रतिदिन एक बदलने हेतु) लाल पुष्प — गुड़हल, गुलाब, गेंदा (प्रतिदिन ताजे — 9 दिन हेतु) हल्दी पाउडर (50 ग्राम), चंदन (25 ग्राम) श्रृंगार सामग्री — बिंदी (लाल), चूड़ी (लाल), काजल, मेहंदी, कंघी, शीशा, काजल सुहाग सामग्री — सिंदूर, मंगलसूत्र प्रतीक, बिंदी, चूड़ी, काजल (सौभाग्यवती स्त्री अर्पित करें) फल — नारियल, केला, सेब, अनार, अमरूद (प्रतिदिन भोग हेतु) भोग सामग्री — पूरी-हलवा-चना (अष्टमी/नवमी को), खीर, मिठाई दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा की पुस्तक मौली/कलावा (2 रोल) आम के पत्ते (5 — कलश हेतु) अक्षत — हल्दी मिले साबुत चावल (200 ग्राम) धूप बत्ती या अगरबत्ती (1 पैकेट प्रतिदिन हेतु — 9 पैकेट) कपूर (20 टुकड़े — आरती हेतु) सुपारी (9) और पान के पत्ते (9) लौंग (11) और इलायची (11) नारियल (2 — एक कलश हेतु, एक भोग हेतु) गंगाजल (एक शीशी) कन्या पूजन सामग्री — 9 कन्याओं हेतु भोजन, चुनरी, बिंदी, चूड़ी, दक्षिणा

📝 पूजा विधि — चरण

1

कलश स्थापना एवं ज्वारा बोना — प्रतिपदा (20 मिनट)

यह नवरात्रि का पहला और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। कलश में जल, सुपारी, सिक्का, अक्षत भरें। ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें। मौली बांधें। कलश के बगल में मिट्टी के बर्तन में मिट्टी भरकर गेहूं/जौ के बीज बोएं — ये 9 दिन में अंकुरित होकर "ज्वारा" बनेंगे। अखंड ज्योति (दीपक) प्रज्वलित करें — यह 9 दिन तक जलती रहनी चाहिए।

2

दुर्गा माता का आवाहन एवं स्थापना (10 मिनट)

दुर्गा माता की मूर्ति या चित्र को कलश के पीछे स्थापित करें। "ॐ दुं दुर्गायै नमः, आवाहयामि" बोलकर माता का आवाहन करें। लाल चुनरी ओढ़ाएं। सिंदूर, कुमकुम, हल्दी लगाएं। बिंदी लगाएं। माता से प्रार्थना करें कि 9 दिन अपने भक्तों की रक्षा करें और मनोकामना पूर्ण करें।

3

नित्य पूजन — श्रृंगार एवं पुष्प अर्पण (10 मिनट प्रतिदिन)

प्रतिदिन माता को ताजे लाल पुष्प (गुड़हल, गुलाब) चढ़ाएं। श्रृंगार सामग्री — बिंदी, काजल, चूड़ी, कंघी, शीशा अर्पित करें। प्रत्येक दिन एक विशेष देवी रूप का ध्यान करें — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री। प्रत्येक देवी रूप का मंत्र पढ़ें।

4

दुर्गा सप्तशती या चालीसा पाठ (15-30 मिनट प्रतिदिन)

यदि समय हो तो दुर्गा सप्तशती (700 श्लोक) का नित्य पाठ करें — 9 दिन में संपूर्ण पाठ हो जाता है। यदि इतना समय न हो तो दुर्गा चालीसा (5-7 मिनट) या "ॐ दुं दुर्गायै नमः" का 108 बार जाप करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ बहुत शक्तिशाली है — इसमें देवी द्वारा महिषासुर, शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज वध की कथाएं हैं।

5

नित्य भोग एवं आरती (10 मिनट प्रतिदिन)

प्रतिदिन माता को फल, मिठाई और जल का भोग लगाएं। "जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी, तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवजी..." पूरी आरती गाएं। कपूर से आरती करें। घंटी बजाएं। अखंड ज्योति को देखें — यदि बुझ गई हो तो तुरंत जलाएं और क्षमा मांगें। ज्वारा में प्रतिदिन जल छिड़कें।

6

अष्टमी पूजन — विशेष विस्तृत पूजा (30 मिनट)

अष्टमी (आठवां दिन) नवरात्रि का सबसे शुभ दिन है। इस दिन विशेष विस्तृत पूजा करें। माता को पूरी, हलवा, चना (काले चने), खीर का भोग लगाएं। हवन कर सकें तो उत्तम — हवन कुंड में घी, तिल और हवन सामग्री की 108 आहुतियां दें। "ॐ दुं दुर्गायै स्वाहा" बोलकर आहुति दें।

7

कन्या पूजन — अष्टमी या नवमी (45 मिनट)

यह नवरात्रि का अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। 2-10 वर्ष की 9 कन्याओं (और एक बालक — भैरव रूप) को आमंत्रित करें। उनके पैर धोएं। माथे पर तिलक लगाएं। उन्हें भोजन (पूरी, हलवा, चना, खीर) कराएं। प्रत्येक कन्या को लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ी और दक्षिणा दें। कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें — ये नौ दुर्गा रूपों का प्रतीक हैं।

8

नवमी पूजन एवं हवन (20 मिनट)

नवमी (नौवां दिन) को अंतिम विस्तृत पूजा करें। माता को सभी श्रृंगार सामग्री, फल, मिठाई और भोग अर्पित करें। यदि हवन न किया हो तो आज करें। नौ दिन के पाठ का समापन करें। "ॐ जय दुर्गे दुर्गति नाशिनी" बोलकर पुष्पांजलि अर्पित करें।

9

दशमी — विजयदशमी एवं विसर्जन (15 मिनट)

दसवें दिन (विजयदशमी/दशहरा) कलश विसर्जन करें। कलश का जल तुलसी या अन्य पौधे पर छिड़कें। ज्वारा (अंकुरित गेहूं) को पवित्र नदी में प्रवाहित करें या पौधों में डालें। अखंड ज्योति बुझाकर माता को विदाई दें — "या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः" बोलें।

10

व्रत पारण (10 मिनट)

नवरात्रि व्रत खोलें — पहले माता का प्रसाद (भोग) ग्रहण करें, फिर सामान्य भोजन करें। व्रत खोलते समय पहले हल्का फलाहार या दूध लें, सीधे भारी भोजन न करें। 9 दिन के तप और भक्ति का फल अवश्य मिलता है — माता की कृपा से मनोकामना पूर्ण होती है।

11

नित्य दुर्गा पूजा — मंगलवार/शुक्रवार हेतु सरल विधि (20 मिनट)

नवरात्रि के अतिरिक्त प्रत्येक मंगलवार या शुक्रवार को सरल दुर्गा पूजा कर सकते हैं। माता के चित्र/मूर्ति के सामने बैठें, लाल पुष्प और सिंदूर चढ़ाएं, दुर्गा चालीसा पढ़ें, "ॐ दुं दुर्गायै नमः" 108 बार जाप करें, भोग लगाएं और आरती करें। इतनी सरल पूजा भी माता को प्रसन्न करती है।

📿 मंत्र

ॐ दुं दुर्गायै नमः

"दुं" देवी दुर्गा का बीज मंत्र है जो शक्ति, रक्षा और बाधा निवारण का प्रतीक है। इस मंत्र का अर्थ है — दुर्गम (कठिन) परिस्थितियों से तारने वाली देवी दुर्गा को मेरा नमस्कार।

📿 अन्य मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे (नवार्ण मंत्र — दुर्गा सप्तशती का मूल मंत्र)

⚠️ ये गलतियाँ न करें

✅ पूजा के बाद

✅ लाभ

  • शत्रुओं, बाधाओं और बुरी शक्तियों का विनाश — जैसे दुर्गा ने महिषासुर का वध किया
  • शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और निर्भयता की प्राप्ति — विशेषकर कठिन समय में माता शक्ति देती हैं
  • परिवार की रक्षा, सुख-शांति एवं संतान कल्याण
  • मांगलिक दोष, ग्रह बाधा और वास्तु दोष का शमन — नवरात्रि में पूजा से ग्रह पीड़ा कम होती है
  • सौभाग्य, वैवाहिक सुख एवं दांपत्य जीवन में प्रेम — विवाह योग्य कन्याओं के लिए उत्तम वर प्राप्ति

❓ FAQ

नवरात्रि में व्रत कैसे रखें?

नौ दिन फलाहार करें — कुट्टू (buckwheat) का आटा, साबूदाना, सिंघाड़ा आटा, समा के चावल, आलू, दूध, दही, फल, मेवे, मूंगफली, सेंधा नमक खा सकते हैं। वर्जित — अनाज (गेहूं, चावल, दाल), लहसुन, प्याज, मांसाहार, मद्यपान। यदि पूरे 9 दिन व्रत कठिन लगे तो पहले-अंतिम दिन या अष्टमी-नवमी का व्रत रखें।

क्या घर में दुर्गा पूजा कर सकते हैं?

हां, घर में दुर्गा चित्र या मूर्ति स्थापित कर सरल विधि से पूजा कर सकते हैं। कलश स्थापना करें, अखंड ज्योति रखें, प्रतिदिन दुर्गा चालीसा पढ़ें और आरती करें। बंगाली परंपरा जैसी विशाल दुर्गा पूजा (प्राण प्रतिष्ठा, धुनुची नाच, सिंदूर खेला) पंडित की सहायता से करें।

क्या महिलाएं नवरात्रि में पूजा कर सकती हैं?

बिल्कुल हां। दुर्गा स्वयं स्त्री शक्ति की देवी हैं। महिलाएं कलश स्थापना, पूजन, पाठ, आरती — सब स्वयं कर सकती हैं। मासिक धर्म के संबंध में — कुछ परंपराओं में उन दिनों पूजा से दूर रहने का विधान है, परंतु कई विद्वान मानते हैं कि भक्ति में कोई बाधा नहीं। आप अपनी परंपरा अनुसार निर्णय लें।

क्या बिना पंडित के घर पर नवरात्रि पूजा कर सकते हैं?

हां, घर पर सरल विधि से पूजा करें — कलश स्थापना करें, अखंड ज्योति जलाएं, ज्वारा बोएं, प्रतिदिन दुर्गा चालीसा या "ॐ दुं दुर्गायै नमः" जाप करें, भोग लगाएं और आरती करें। अष्टमी/नवमी पर कन्या पूजन करें। माता भक्ति भाव देखती हैं। हवन या सप्तशती पाठ हेतु पंडित बुला सकते हैं।

पूजा में कोई गलती हो जाए तो क्या करें?

माता दुर्गा अपने भक्तों की रक्षिका हैं — वे गलतियां क्षमा करती हैं। यदि अखंड ज्योति बुझ जाए तो तुरंत जलाएं और क्षमा मांगें। मंत्र गलत हो जाए तो पुनः बोलें। कोई सामग्री भूल जाएं तो सरल प्रार्थना करें। पूजा के अंत में "अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया, दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि" बोलें — अर्थात "हे परमेश्वरी, मुझसे दिन-रात अनेक अपराध होते हैं, मुझे अपना दास मानकर क्षमा करें।"

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