हनुमान पूजा
📖 कथा / महत्व
हनुमान जी पवनदेव और माता अंजनी के पुत्र हैं। बाल्यकाल में उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगलने का प्रयास किया, जिस पर इंद्र ने वज्र से प्रहार किया और उनकी हनु (ठुड्डी) टूट गई — इसलिए नाम हनुमान पड़ा। वे भगवान राम के परम भक्त हैं और लंका में सीता माता की खोज, संजीवनी बूटी लाना तथा लंका दहन उनके प्रमुख पराक्रम हैं। चिरंजीवी होने के कारण माना जाता है कि जहां राम कथा होती है, वहां हनुमान जी अवश्य उपस्थित रहते हैं।
🧘 पूजा से पहले — तैयारी
- → पूजा से पहले स्नान अवश्य करें — बिना स्नान के हनुमान पूजा न करें
- → मांसाहार और मदिरा का सेवन पूजा के दिन पूर्णतः वर्जित है — ब्रह्मचर्य का पालन करें
- → पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें — विशेषकर सिंदूर और चमेली तेल का मिश्रण पहले बना लें
- → पूजा स्थल पर जूते-चप्पल न पहनें और स्थान को गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- → हनुमान चालीसा की पुस्तक पहले से रख लें — पाठ बीच में रोकना अशुभ माना जाता है
📋 सामग्री
📝 पूजा विधि — चरण
स्नान एवं तैयारी (5 मिनट)
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल या केसरिया रंग का वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल को गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें।
आसन एवं मूर्ति स्थापना (3 मिनट)
चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। मूर्ति का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखें। सामने जल कलश, दीपक और भोग सामग्री व्यवस्थित रखें।
दीप प्रज्वलन एवं संकल्प (3 मिनट)
चमेली के तेल का दीपक जलाएं और धूप लगाएं। हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लेकर संकल्प करें — अपना नाम, गोत्र और पूजा का उद्देश्य बोलें। संकल्प के बाद जल भूमि पर छोड़ें।
गणेश वंदना (2 मिनट)
सर्वप्रथम भगवान गणेश का स्मरण करें और "ॐ गं गणपतये नमः" का तीन बार जाप करें। गणेश जी को अक्षत और पुष्प अर्पित करें। विघ्न निवारण हेतु प्रार्थना करें।
सिंदूर चोला अर्पण (5 मिनट)
चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर गाढ़ा घोल बनाएं। इस चोले को अनामिका उंगली से हनुमान जी की मूर्ति पर लगाएं। स्वयं भी माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं। चोला लगाते समय "ॐ हं हनुमते नमः" का जाप करें।
पुष्प एवं माला अर्पण (3 मिनट)
हनुमान जी को लाल गेंदा या गुड़हल की माला पहनाएं। खुले पुष्प चरणों में अर्पित करें। पान के पत्ते और सुपारी भी चढ़ाएं। मौली (लाल धागा) मूर्ति के चरणों में बांधें।
हनुमान चालीसा पाठ (15 मिनट)
भक्तिपूर्वक हनुमान चालीसा का पूर्ण पाठ करें। "श्रीगुरु चरन सरोज रज" दोहे से आरंभ करें और अंत तक पढ़ें। शांत मन से स्पष्ट उच्चारण करें। विशेष कामना होने पर बजरंग बाण का पाठ भी करें।
मंत्र जाप (5 मिनट)
"ॐ हं हनुमते नमः" मंत्र का 108 बार या न्यूनतम 21 बार जाप करें। जाप के लिए रुद्राक्ष की माला उत्तम है। प्रत्येक जाप में मन को हनुमान जी के स्वरूप पर एकाग्र रखें।
भोग अर्पण (3 मिनट)
बूंदी के लड्डू, गुड़-चना दाल, केला और नारियल का भोग लगाएं। भोग की थाली में तुलसी दल न रखें क्योंकि हनुमान पूजा में तुलसी वर्जित है। इलायची और लौंग भी भोग में रखें।
आरती (5 मिनट)
"आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की" आरती पूर्ण भक्ति से गाएं। कपूर या घी के दीपक से आरती करें। आरती के बाद घंटी बजाएं।
परिक्रमा एवं प्रणाम (3 मिनट)
हनुमान जी की 3, 5 या 7 परिक्रमा करें। प्रत्येक परिक्रमा में "जय श्री राम" का उच्चारण करें। अंत में साष्टांग प्रणाम करें और मूर्ति के चरणों से मौली का धागा लेकर कलाई पर बांधें।
प्रसाद वितरण (3 मिनट)
भोग का प्रसाद सभी परिवारजनों में वितरित करें। लड्डू और गुड़-चना दाल सबको दें। प्रसाद पहले बच्चों और बुजुर्गों को दें। कुछ प्रसाद गाय को भी खिलाएं।
📿 मंत्र
ॐ हं हनुमते नमः
वीर हनुमान को मेरा नमन है।
📿 अन्य मंत्र
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
बुद्धिर्बलं यशोधैर्यं निर्भयत्वं अरोगता। अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत्॥
ॐ नमो हनुमते भयभंजनाय सुखकराय मनोवांछित फलदाय स्वाहा
⚠️ ये गलतियाँ न करें
- ✗ हनुमान जी को तुलसी न चढ़ाएं — तुलसी विष्णु पूजा के लिए है, हनुमान पूजा में वर्जित मानी जाती है
- ✗ शिवलिंग पर चढ़ा सिंदूर हनुमान जी को न लगाएं — हमेशा ताजा सिंदूर और तेल का मिश्रण प्रयोग करें
- ✗ हनुमान चालीसा का पाठ अधूरा न छोड़ें — यदि आरंभ किया है तो पूरा पाठ अवश्य करें
- ✗ पूजा में काले वस्त्र न पहनें — लाल, केसरिया या पीले वस्त्र धारण करें
- ✗ दीपक बुझने न दें — पूजा पूर्ण होने तक दीपक जलता रहना चाहिए, बुझ जाए तो पुनः जलाएं
✅ पूजा के बाद
- → प्रसाद का लड्डू और गुड़-चना सबसे पहले किसी जरूरतमंद को दें — हनुमान जी दास भाव के देवता हैं
- → मंगलवार या शनिवार को पूजा के बाद हनुमान मंदिर जाकर तेल और सिंदूर चढ़ाएं — यह अतिरिक्त फलदायक होता है
- → पूजा के बाद शाम तक सात्विक भोजन करें — प्याज, लहसुन और मांसाहार से बचें
✅ लाभ
- • भय, बाधा और बुरी शक्तियों से तत्काल मुक्ति — हनुमान जी भूत-प्रेत बाधा निवारक माने जाते हैं
- • शारीरिक बल, स्वास्थ्य एवं साहस की प्राप्ति — पहलवान और खिलाड़ी विशेष रूप से पूजा करते हैं
- • शनि दोष, मांगलिक दोष एवं कालसर्प दोष शांति — ज्योतिष में हनुमान पूजा सर्वोत्तम उपाय है
- • न्यायालय के मामलों एवं शत्रु भय में विजय — बजरंग बाण का पाठ विशेष प्रभावी होता है
- • मानसिक शांति एवं आत्मविश्वास में वृद्धि — हनुमान चालीसा नियमित पाठ से भय दूर होता है
❓ FAQ
हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाते हैं?
रामायण के अनुसार सीता माता ने बताया कि सिंदूर से श्री राम की आयु बढ़ती है। हनुमान जी ने अपार भक्ति में पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। तभी से सिंदूर चोला चढ़ाने की परंपरा है।
क्या महिलाएं हनुमान पूजा कर सकती हैं?
हां, महिलाएं हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं और घर पर पूजा कर सकती हैं। कुछ परंपराओं में मूर्ति स्पर्श की मनाही है, लेकिन मंत्र जाप और चालीसा पाठ का पूर्ण अधिकार है।
हनुमान पूजा में तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते?
हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं और तुलसी को विष्णु पत्नी (लक्ष्मी स्वरूप) माना जाता है। ब्रह्मचारी देवता को सौभाग्य सूचक तुलसी अर्पित करना उचित नहीं माना जाता। इसके स्थान पर लाल पुष्प और पान चढ़ाएं।
क्या शनिवार को हनुमान पूजा करनी चाहिए?
हां, शनिवार को हनुमान पूजा अत्यंत फलदायक है। हनुमान जी ने शनि देव को लंका में बंधन से मुक्त किया था, तब शनि देव ने वचन दिया कि हनुमान भक्तों को कष्ट नहीं देंगे। इसलिए शनि दोष शांति हेतु शनिवार को हनुमान पूजा करें।
हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़ें?
नित्य एक बार पाठ पर्याप्त है। विशेष कामना होने पर मंगलवार और शनिवार को 7 या 11 बार पाठ करें। अत्यंत कठिन समस्या में 40 दिन तक नित्य 7 बार पाठ का संकल्प लें।
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