तुलसी पूजा

माता तुलसी (वृंदा देवी) 15-30 मिनट प्रतिदिन संध्या, तुलसी विवाह (देवउठनी एकादशी)

📖 कथा / महत्व

तुलसी पूर्व जन्म में वृंदा नाम की पतिव्रता स्त्री थीं, जो दैत्यराज जालंधर की पत्नी थीं। वृंदा के पातिव्रत्य धर्म के कारण जालंधर अजेय था। भगवान विष्णु ने छल से वृंदा का पातिव्रत्य भंग किया जिससे जालंधर का वध हो सका। वृंदा ने क्रोध में विष्णु को शिला (शालिग्राम) बनने का श्राप दिया, तब विष्णु ने वृंदा को वरदान दिया कि वे तुलसी पौधे के रूप में सदा मेरे समीप रहेंगी और बिना तुलसी दल के मेरी पूजा अधूरी मानी जाएगी।

🗓️ सर्वोत्तम दिन: प्रतिदिन सायंकाल (नित्य पूजा सर्वोत्तम)देवउठनी एकादशी — तुलसी विवाह हेतु (कार्तिक शुक्ल एकादशी)कार्तिक मास का प्रत्येक दिन (विशेष फलदायक)एकादशी तिथि एवं पूर्णिमा ⏱️ 15-20 मिनट (नित्य पूजा), 1-1.5 घंटे (तुलसी विवाह) 🟢 शुरुआती

🧘 पूजा से पहले — तैयारी

📋 सामग्री

तुलसी का पौधा (वृंदावन/गमले में) — 1 शुद्ध जल — 1 लोटा (तांबे का उत्तम) हल्दी पाउडर — 1 छोटा पैकेट (25 ग्राम) कुमकुम/रोली — 1 छोटा पैकेट घी का दीपक — 1 (मिट्टी का दीया) रुई की बत्ती — 5 अक्षत (हल्दी मिले चावल) — 1 कटोरी ताजे पुष्प (गेंदा, गुलाब) — 5-7 धूप बत्ती — 1 पैकेट मौली (लाल धागा) — 1 बंडल कपूर — 5 टुकड़े नारियल — 1 छोटा (विशेष पूजा में) आंवला — 2-3 (कार्तिक मास में) लाल चुनरी — 1 छोटी (तुलसी विवाह में) गन्ने का टुकड़ा — 2 (तुलसी विवाह में) शालिग्राम या विष्णु मूर्ति (तुलसी विवाह में) मिठाई (पेड़ा या बताशे) — 100 ग्राम चंदन — 1 छोटा पैकेट गंगाजल — 1 छोटी शीशी मिट्टी के छोटे दीये — 5-7 (कार्तिक मास में) तुलसी माला (लकड़ी की) — 1 (जाप हेतु, वैकल्पिक) पंचामृत सामग्री — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (विशेष पूजा में) लौंग — 5 इलायची — 5 सुपारी — 2-3

📝 पूजा विधि — चरण

1

वृंदावन की सफाई (2 मिनट)

तुलसी के गमले (वृंदावन) के आसपास झाड़ू लगाएं। सूखे पत्ते और टहनियां हटाएं। गमले की बाहरी दीवार पर गीले कपड़े से पोछा लगाएं। वृंदावन को सदैव स्वच्छ रखना तुलसी माता की सेवा का प्रथम चरण है।

2

गमले पर स्वस्तिक एवं सजावट (2 मिनट)

गमले की बाहरी दीवार पर हल्दी-कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं। गमले के चारों ओर मौली बांधें। यदि कार्तिक मास है तो गमले के चारों ओर छोटे दीये रखें। रंगोली बनाना भी शुभ है।

3

जलार्पण (2 मिनट)

तांबे के लोटे से तुलसी को शुद्ध जल अर्पित करें। जल धीरे-धीरे जड़ में डालें, पत्तों पर नहीं। सायंकाल पूजा में जल न दें — जल प्रातःकाल ही दें। "ॐ तुलस्यै नमः" बोलते हुए जल चढ़ाएं।

4

हल्दी-कुमकुम एवं चंदन (2 मिनट)

तुलसी के तने पर (मुख्य डंठल पर) हल्दी-कुमकुम लगाएं। चंदन का तिलक भी लगाएं। अक्षत (हल्दी मिले चावल) तुलसी की जड़ में रखें। यह सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।

5

पुष्प अर्पण (1 मिनट)

ताजे पुष्प तुलसी की जड़ में अर्पित करें। गेंदा, गुलाब या मौसमी फूल चढ़ा सकते हैं। पुष्प सूखे या मुरझाए हुए न हों। तुलसी के अपने पुष्प (मंजरी) को न तोड़ें — वे स्वतः भगवान को समर्पित हैं।

6

दीप प्रज्वलन (2 मिनट)

घी का दीपक जलाकर तुलसी के समीप रखें। दीया गमले के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें। कार्तिक मास में एक से अधिक दीये जलाना विशेष शुभ है। दीपक की लौ से तुलसी की पत्तियां न जलें इसका ध्यान रखें।

7

धूप अर्पण (1 मिनट)

धूप बत्ती जलाकर तुलसी जी को दिखाएं। धूप की सुगंध से वातावरण पवित्र होता है। अगरबत्ती तुलसी के पास रख दें लेकिन सीधे पौधे पर न लगाएं। चंदन या गुग्गुल की धूप सर्वोत्तम है।

8

तुलसी मंत्र जाप (3 मिनट)

"ॐ तुलस्यै नमः" मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें। तुलसी की लकड़ी की माला पर जाप करना विशेष फलदायक है। जाप करते समय तुलसी माता के स्वरूप का ध्यान करें — वे भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय हैं।

9

तुलसी स्तुति पाठ (3 मिनट)

"तुलसी महारानी नमो नमो, हरि की पटरानी नमो नमो" स्तुति का पाठ करें। या "यन्मूले सर्वतीर्थानि यन्मध्ये सर्वदेवताः" श्लोक पढ़ें। तुलसी माता से परिवार की सुख-शांति हेतु प्रार्थना करें।

10

परिक्रमा (2 मिनट)

तुलसी जी की 3, 5 या 7 परिक्रमा करें। परिक्रमा में "हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे" महामंत्र का जाप करें। परिक्रमा सदैव दक्षिणावर्त (clockwise) करें।

11

आरती एवं प्रणाम (2 मिनट)

कपूर या घी के दीपक से तुलसी माता की आरती करें। दीपक को तीन बार घुमाएं। आरती के बाद दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करें। तुलसी के चरणों (जड़) की मिट्टी माथे पर लगाएं — यह अत्यंत पवित्र मानी जाती है।

12

प्रसाद वितरण (1 मिनट)

मिठाई या बताशे का प्रसाद परिवारजनों में बांटें। तुलसी दल (यदि प्रातः तोड़ा हो) भगवान विष्णु की मूर्ति पर चढ़ाएं। प्रसाद में तुलसी दल मिला पंचामृत सर्वोत्तम माना जाता है।

📿 मंत्र

ॐ तुलस्यै नमः

पवित्र तुलसी माता को मेरा नमन है।

📿 अन्य मंत्र

यन्मूले सर्वतीर्थानि यन्मध्ये सर्वदेवताः। यदग्रे सर्ववेदाश्च तुलसीं त्वां नमाम्यहम्॥

तुलसी श्रीसखी शुभे पापहारिणी पुण्यदे। नमस्ते नारदनुते नारायण मनःप्रिये॥

महाप्रसाद जननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी। आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोऽस्तु ते॥

⚠️ ये गलतियाँ न करें

✅ पूजा के बाद

✅ लाभ

  • घर में सकारात्मक ऊर्जा एवं शुद्ध वातावरण — तुलसी का पौधा ऑक्सीजन देता है और मच्छरों को दूर रखता है
  • वैवाहिक सुख एवं पारिवारिक सामंजस्य — तुलसी विवाहित स्त्रियों के सौभाग्य की रक्षा करती हैं
  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा — तुलसी विष्णु प्रिया हैं, उनकी पूजा से विष्णु स्वतः प्रसन्न होते हैं
  • रोग निवारण — तुलसी में औषधीय गुण हैं, सर्दी-खांसी, बुखार और पाचन समस्याओं में लाभ होता है
  • घर में लक्ष्मी का वास — जिस घर में तुलसी हरी-भरी रहती है, वहां धन-धान्य की कमी नहीं होती

❓ FAQ

तुलसी को रविवार में तोड़ना चाहिए या नहीं?

रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति और अमावस्या को तुलसी दल तोड़ना वर्जित माना गया है। इन दिनों पहले से तोड़े हुए पत्ते प्रयोग करें या बिना पत्ते तोड़े ही पूजा करें।

तुलसी विवाह कब और कैसे करें?

देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) पर तुलसी का विवाह शालिग्राम या विष्णु मूर्ति से कराते हैं। तुलसी को लाल चुनरी ओढ़ाएं, गन्ने का मंडप बनाएं, और विवाह की रस्में निभाएं। इसके बाद ही शादी-ब्याह का मौसम शुरू होता है।

क्या तुलसी का पौधा घर के अंदर रख सकते हैं?

तुलसी को खुली हवा और धूप चाहिए, इसलिए आंगन, बालकनी या छत पर रखना उचित है। पूर्णतः बंद कमरे में पौधा मुरझा जाएगा। हां, खिड़की के पास जहां धूप आती हो वहां रख सकते हैं।

तुलसी का पौधा सूख जाए तो क्या करें?

सूखी तुलसी को फेंकें नहीं। सूखे पौधे को किसी नदी या पवित्र जल में प्रवाहित करें। तुरंत नया तुलसी का पौधा लगाएं। सूखने से बचाव के लिए नियमित जल दें, अत्यधिक धूप से बचाएं और ठंड में ढकें।

क्या तुलसी पूजा पुरुष भी कर सकते हैं?

बिल्कुल हां। तुलसी पूजा स्त्री-पुरुष दोनों कर सकते हैं। परंपरागत रूप से गृहणी सायंकाल तुलसी पूजा करती हैं, लेकिन शास्त्रों में कोई प्रतिबंध नहीं है। कार्तिक मास में पुरुषों द्वारा तुलसी पूजा विशेष पुण्यदायक है।

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