रमा एकादशी व्रत कथा
Rama Ekadashi Vrat Katha
संक्षिप्त उत्तर
रमा एकादशी कार्तिक कृष्ण पक्ष में आती है। "रमा" माता लक्ष्मी का नाम है। इस व्रत से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है। यह एकादशी दरिद्रता, पापों और कष्टों का नाश करती है। धन-सम्पत्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति हेतु यह व्रत अत्यंत फलदायी है।
रमा एकादशी व्रत कथा — संपूर्ण कथा
ब्रह्म वैवर्त पुराण में वर्णित है कि सतयुग में मुर नामक एक अत्यंत भयंकर दैत्य था। उसने अपने तप और बल से समस्त देवताओं को पराजित कर दिया था। देवलोक पर उसका अधिकार हो गया और देवता भयभीत होकर इधर-उधर छिप गए। मुर दैत्य का आतंक तीनों लोकों में फैल गया।
देवराज इन्द्र सहित सभी देवता भगवान शिव के पास गए और उनसे सहायता माँगी। भगवान शिव ने कहा — "यह कार्य भगवान विष्णु ही कर सकते हैं। तुम सब क्षीरसागर जाकर भगवान नारायण की शरण लो।" तब सभी देवता क्षीरसागर पहुँचे और भगवान विष्णु की स्तुति करने लगे।
भगवान विष्णु ने देवताओं की प्रार्थना सुनकर मुर दैत्य से युद्ध किया। यह युद्ध बहुत लम्बा और भीषण था। मुर दैत्य माया से अनेक रूप धारण करता और भगवान पर आक्रमण करता। भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से मुर का वध किया। इसीलिए भगवान विष्णु को "मुरारि" कहा जाता है।
मुर दैत्य के वध से देवताओं को स्वर्ग पुनः प्राप्त हुआ। माता लक्ष्मी (रमा) ने भगवान विष्णु की इस वीरता से अत्यंत प्रसन्न होकर कहा — "हे प्रभु! कार्तिक कृष्ण पक्ष की जो एकादशी है, वह मेरे नाम से जानी जाएगी। मैं इस दिन व्रत रखने वालों पर विशेष कृपा करूँगी।"
भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी की प्रार्थना स्वीकार की और कहा — "हे रमे! इस एकादशी को तुम्हारे नाम से रमा एकादशी कहा जाएगा। जो मनुष्य इस दिन व्रत करेगा, उसके घर में कभी दरिद्रता नहीं आएगी। तुम सदा उसके घर में निवास करोगी।"
भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा — "हे धर्मराज! रमा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत दरिद्रता का नाश करता है, पापों को जलाता है और अंत में वैकुण्ठ की प्राप्ति कराता है। यह कथा सुनने मात्र से भी पुण्य मिलता है।"
संदर्भ: ब्रह्म वैवर्त पुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को रमा एकादशी का माहात्म्य सुनाया है। इसमें मुर दैत्य के वध और माता लक्ष्मी की कृपा की कथा वर्णित है।
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कार्तिक कृष्ण पक्ष को भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी (रमा) की पूजा कैसे करें?
संकल्प और स्नान
प्रातःकाल स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा के समक्ष बैठकर रमा एकादशी व्रत का संकल्प लें।
लक्ष्मी-नारायण पूजा
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की संयुक्त पूजा करें। दोनों प्रतिमाओं को पंचामृत स्नान कराएं। पीतांबर पहनाएं। भगवान को तुलसी और माता लक्ष्मी को कमल पुष्प चढ़ाएं।
विशेष पूजन
माता लक्ष्मी के समक्ष श्रीयंत्र या लक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। हल्दी और कुमकुम से पूजन करें। कमल के फूल, सुपारी और नारियल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं।
मंत्र जाप
विष्णु मंत्र और लक्ष्मी मंत्र दोनों का जाप करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" और "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" — दोनों मंत्रों की 108-108 माला जपें।
कथा श्रवण और जागरण
सायंकाल रमा एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें। रात्रि में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के भजन गाते हुए जागरण करें।
पारण और दान
द्वादशी को प्रातः भगवान की पूजा करें। ब्राह्मण भोजन कराएं। सुहागिन स्त्रियों को सुहाग सामग्री दान करें। फिर स्वयं पारण करें।
रमा एकादशी व्रत कथा में क्या सामग्री चाहिए?
📿 मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी-नारायणाभ्यां नमः
समस्त ऐश्वर्य, सौन्दर्य और शक्ति के स्वामी भगवान लक्ष्मी-नारायण को मेरा नमस्कार है। यह मंत्र धन-सम्पत्ति और सुख-समृद्धि प्रदान करता है।
📿 अन्य मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
ॐ मुरारये नमः
रमा एकादशी व्रत कथा के नियम
- • दशमी को सात्विक और हल्का भोजन करें
- • एकादशी को फलाहार या निर्जल व्रत रखें
- • किसी से भी कर्ज न माँगें और न दें इस दिन
- • लक्ष्मी-नारायण का ध्यान और स्मरण करें
- • सत्य बोलें, क्रोध और लोभ से बचें
- • रात्रि जागरण करें
- • द्वादशी को दान-पुण्य और ब्राह्मण भोजन करके पारण करें
✅ क्या खाएं
- → फल — केला, सेब, अनार, नाशपाती
- → साबूदाना खिचड़ी
- → कुट्टू और सिंघाड़े का आटा
- → मखाने और काजू
- → दूध, दही, पनीर
- → आलू और अरबी
- → नारियल पानी और शरबत
❌ क्या न खाएं
- ✗ चावल — एकादशी पर वर्जित
- ✗ गेहूँ, जौ और अनाज
- ✗ दालें और राजमा-छोले
- ✗ प्याज, लहसुन
- ✗ माँसाहार और मदिरा
- ✗ बासी और तामसिक भोजन
- ✗ अधिक तैलीय पदार्थ
रमा एकादशी व्रत कथा के लाभ
- • दरिद्रता और आर्थिक कष्टों का नाश होता है
- • माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है
- • घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है
- • समस्त पापों का क्षय होता है
- • दाम्पत्य जीवन में सुख और प्रेम बढ़ता है
- • व्यापार और आजीविका में उन्नति होती है
- • अंत में वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रमा एकादशी में "रमा" का क्या अर्थ है?
"रमा" माता लक्ष्मी का एक नाम है। यह नाम संस्कृत धातु "रम्" से बना है जिसका अर्थ है "रमण करने वाली" अर्थात् सुख और आनन्द देने वाली। इस एकादशी पर माता लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है।
क्या इस एकादशी पर लक्ष्मी पूजा करनी चाहिए?
हाँ, रमा एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व है। कमल पुष्प और श्रीयंत्र से पूजा करें।
रमा एकादशी और देवउत्थान एकादशी में क्या अंतर है?
रमा एकादशी कार्तिक कृष्ण पक्ष में आती है जबकि देवउत्थान एकादशी कार्तिक शुक्ल पक्ष में। रमा एकादशी लक्ष्मी जी से सम्बन्धित है जबकि देवउत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं।
क्या यह व्रत धन प्राप्ति में सहायक है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार रमा एकादशी का व्रत माता लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक यह व्रत करता है, उसके घर में कभी दरिद्रता नहीं आती और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
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