राधा-कृष्ण की आरती

राधा कृष्ण आरती

Radha Krishna Aarti

राधा कृष्ण आरती — राधा-कृष्ण

आरती लिरिक्स

आरती राधा-कृष्ण जू की, कमल दल नैनन की।

बाँकी छवि अपार, अलबेली आरती॥

आरती राधा-कृष्ण जू की॥

गले में वैजंती माला, कमर में करधनी।

ललित छवि श्याम सलोने, राधे सँग रासलीला॥

आरती राधा-कृष्ण जू की॥

कुंज गलिन में ठाढ़े, मुरली की तान सुनाये।

राधा रानी संग लीला, कान्हा मन भाये॥

आरती राधा-कृष्ण जू की॥

माखन मिश्री से भोग, लगावत सखियाँ।

मोर मुकुट शिर साजे, बाजत पैजनियाँ॥

आरती राधा-कृष्ण जू की॥

यमुना तट पर विहारत, गोपी संग नाचत।

वृन्दावन के कुंज गली, राधा मन रमायें॥

आरती राधा-कृष्ण जू की॥

नन्द यशोदा के लाला, गोकुल के रंगीला।

सूरदास प्रभु तेरे, चरण कमल में आसरा॥

आरती राधा-कृष्ण जू की॥

राधा-कृष्ण की आरती, जो कोई गावे।

सूरदास प्रभु कृपा करें, मन वांछित फल पावे॥

आरती राधा-कृष्ण जू की॥

आरती का अर्थ एवं महत्व

राधा-कृष्ण की यह आरती वृंदावन की रासलीला और प्रेम भक्ति की अनुपम अभिव्यक्ति है। इसमें कृष्ण के सुंदर स्वरूप और राधा रानी के साथ उनकी दिव्य लीला का वर्णन है। जन्माष्टमी, राधाष्टमी और वृंदावन के मंदिरों में यह आरती प्रतिदिन गाई जाती है।

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